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जयपुर, 28 मार्च, 2016: जयपुर में “इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ़ शार्ट फिल्म्स ऑन कल्चर एंड टूरिज्म-III” के उद्धघाटन के अवसर पर मेरे भाषण के मुख्य अंश :

 केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री श्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने आज यहाँ कहा कि विश्व में आतंकवाद, कट्टरवाद की चुनौतियों और मजहब को सुरक्षा कवच बनाकर इंसानियत का कत्लेआम करने पर तुली शैतानी ताकतों के खिलाफ लघु फिल्में और डॉक्यूमेंटरी विश्व में क्रांति पैदा कर सकती हैं।

जयपुर में “इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ़ शार्ट फिल्म्स ऑन कल्चर एंड टूरिज्म-III” के उद्धघाटन के अवसर पर श्री नक़वी ने कहा कि लघु फिल्में और डॉक्यूमेंटरी ऐसी शैतानी ताकतों के घृणित मंसूबों और मानसिकता के पीछे का विनाशकारी सच लोगों के बीच बेनकाब कर सकती हैं, विश्व में लघु फिल्म निर्माताओं द्वारा एकजुट हो कर इस दिशा में मुहीम चलाने की जरुरत है।

श्री नक़वी ने कहा कि "छोटी फिल्में" समाज में एक "बड़ा संदेश" देने में कामयाब रहती हैं और "डॉक्यूमेंट्री रिवोलूशन" समाज के सभी पहलुओं का आईना बन सकता है। भारत में सिनेमा का इतिहास कई दशकों पुराना है। 1913 में भारतीय सिनेमा के जनक कहे जाने वाले दादासाहब फाल्के की बनाई हुई फिल्म राजा हरिश्चन्द्र से भारत में सिनेमा का आरंभ माना जाता है, तब से लेकर अब तक भारत के अनेकों फिल्म निर्देशकों और उनकी फिल्मों ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा को साबित किया है।

श्री नक़वी ने कहा कि भारत के लेखकों और प्रोड्यूसर्स की एक लम्बी श्रृंखला है और इन्होने रचनात्मक तरीके से विश्व स्तर की लघु फिल्में और डॉक्यूमेंट्री बनाने में अपना योगदान दिया है, जिनका संदेश पूरे विश्व के मानवीय मूल्यों के लिए प्रेरणा देता रहा है। आज लघु फिल्मों का संदेश विश्व शांति, सौहार्द के लिए “मील का पत्थर” साबित हो सकता है।

श्री नक़वी ने कहा कि लघु फिल्मों ने कई मुद्दों पर जनमानस की चेतना को मजबूत किया है। लघु फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री ने देश के सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, मानवीय अधिकारों, गरीबी, आतंकवाद जैसी चुनौतियों, राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला अधिकारों तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर जनमानस की चेतना को जगाने का काम किया है। लघु फिल्में संक्षिप्त में “बड़ा संदेश” देने का प्रभावशाली माध्यम हैं।

श्री नक़वी ने कहा कि जरुरत इस बात की है कि हॉलीवुड-बॉलीवुड और अन्य दूसरे क्षेत्रीय फिल्म उद्योग की तरह ही लघु फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, केंद्र और राज्य सरकारें इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। लघु फिल्में और डाक्यूमेंट्री के निर्माता आम जनता से जुड़े हुए मुद्दों को सामने लाकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी असरदार तरीके से निभाते हैं।

श्री नक़वी ने कहा कि एक लंबा सफर तय कर आज भारतीय सिनेमा, लघु फिल्म एवं डॉक्यूमेंट्री जगत पूर्ण रूप से स्थापित हो गया है, इसने एक लाभदायक और असरदार उद्योग का रूप ले लिया है। आज बड़े पैमाने पर उद्योग जगत बड़ी, व्यवसायिक फिल्मों में तो पैसा लगा रहा है पर विश्व को शान्ति, सौहार्द का सन्देश देने वाली असरदार लघु फिल्में तंगी का शिकार हैं। इस क्षेत्र में काफी कुछ सुधार की जरुरत है। तकनीक इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल कर बेहतर से बेहतर लघु फिल्में और डॉक्युमेंट्री बनायीं जा सकती हैं। इस काम में बड़े औद्योगिक घराने, सरकार, स्वंय सेवी संगठन को आगे आना चाहिए।

श्री नक़वी ने कहा कि भारत सांस्कृतिक विविधता वाला देश है और इस विविधता और संस्कार-संस्कृति-सामाजिक परिवेश को विश्व स्तर पर प्रचारित करने की जरुरत है। साथ ही विश्व की संस्कृति, घटनाओं को भी भारत में पहुँचाना चाहिए। इसी तरह देश का पर्यटन क्षेत्र भी बहुत विशाल है। इसे पूरी दुनिया के सामने लाने की जरुरत है ताकि देश की खूबसूरती को पूरा विश्व देख सके। लघु फिल्में और डॉक्यूमेंट्री इस दिशा में मददगार साबित हो सकती हैं।

श्री नक़वी ने कहा कि लघु फिल्म निर्माताओं को समाज को संदेश देने वाली, आतंकवाद के खिलाफ मजबूत मुहीम वाली फिल्मों के लिए सोशल मीडिया का प्लेटफार्म भी इस्तेमाल करना चाहिए।

इस कार्यक्रम के आयोजकों इंडियन इंफोटेनमेंट मीडिया कारपोरेशन को बधाई देते हुए श्री नक़वी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से लघु फिल्म और डॉक्यूमेंट्री क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा।IIMC लघु फिल्मों के “बड़े संदेश” को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस तरह के कार्यक्रमों से विभिन्न देशों के लेखकों, निर्माताओं को एक-दूसरे की संस्कृति, संस्कार समझने में मदद भी मिलेगी।