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नई दिल्ली, 14 जुलाई, 2016:अल्पसंख्यक मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मेरी बैठक की प्रेस विज्ञप्ति:

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने आज यहाँ कहा कि मात्र मंत्रालय में बैठ कर कागज़ और कंप्यूटर से विकास का ताना-बाना बनाना ही पर्याप्त नहीं बल्कि अधिकारियों को जमीन पर उतर कर लोगों के सशक्तिकरण के लिए मोदी सरकार के संकल्प को साकार करना होगा।

श्री नक़वी ने अल्पसंख्यक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का असर जिस तरह अन्य क्षेत्रों में जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है और एक विकास और विश्वास का माहौल बना है, वैसा ही विकास और विश्वास का माहौल अल्पसंख्यकों के बीच भी दिखना चाहिए।

श्री नक़वी ने कहा कि मैं आगामी संसद सत्र के बाद सभी राज्यों में अल्पसंख्यकों के आर्थिक-सामाजिक-शैक्षिक सशक्तिकरण की योजनाओं का "ग्राउंड जीरो" पर आंकलन करूँगा। हमें गरीबों के विकास की ईमारत को मजबूत बनाने के लिए पूरी ताकत और ईमानदारी से काम करना होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हमें गरीबों के विकास का जो "ब्लू प्रिंट" दिया है, हमें उसके तहत विकास की ईमारत को ऐसे बनाना है जिससे गरीबों को "समृद्धि और सुरक्षा" का पुख्ता एहसास हो और वह प्रगति की मुख्य धारा का बराबर का हिस्सेदार-भागीदार बन सकें।

श्री नक़वी ने कहा कि हमने राज्य सरकारों से समन्वय-संवाद के माध्यम से केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए काम शुरू कर दिया है। कई राज्य सरकारों, उनके मंत्रियों से इस दौरान बात हुई है, जल्द ही उन राज्यों में जा कर उनके सहयोग से "मिशन सशक्तिकरण" को मजबूत करेंगे।

श्री नक़वी ने कहा कि अल्पसंख्यकों के विकास के लिए फण्ड की कोई कमी नहीं है। हमें सिर्फ इस पैसे को पूरी ईमानदारी से खर्च करना होगा ताकि समाज के आखिरी जरूरतमंद तक विकास की रौशनी पहुंचाई जा सके। श्री नक़वी ने कहा कि सरकार सभी योजनाओं पर कड़ी नजर रखेगी ताकि ये योजनाएं जमीनी स्तर पर लागू हो सकें। इस कार्य में अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

श्री नक़वी ने कहा कि अल्पसंख्यकों विशेषकर युवाओं को बेहतर शिक्षा मुहैया कराना, उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर देना मेरी प्राथमिकता होगी। "हमें अल्पसंख्यक गरीबों के विकास को औपचारिकता नहीं कर्तव्य समझ कर काम करना होगा"। पिछले कई दशकों से अल्पसंख्यकों के विकास की औपचारिकता निभाई गई जिसका नतीजा है कि अल्पसंख्यक विकास की मुख्यधारा में शामिल होने के बजाय गरीबी रेखा के नीचे आता गया। हमें इस "सजावटी सियासी सोंच" से ऊपर उठकर गरीबों के सशक्तिकरण के संकल्प के साथ काम करना होगा।