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नई दिल्ली, 24 फरवरी, 2016: नई दिल्ली में आयोजित राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के वार्षिक सम्मेलन में मेरे संबोधन के मुख्य अंश की प्रेस विज्ञप्ति:

नई दिल्ली, 24 फरवरी, 2016: केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री श्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने आज यहाँ कहा कि कुछ तथाकथित सेक्युलर राजनीतिक पार्टियों द्वारा अल्पसंख्यकों के विकास और विश्वास को कमजोर करने की “राजनीतिक होड़” चिंता का विषय है।

नई दिल्ली में आयोजित राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री नक़वी ने कहा कि कुछ "सेक्युलर सियासी सूरमा" अल्पसंख्यकों के कंधों पर सियासत की बंदूक चला कर वोटों का सौदा करने में ज्यादा यकीन रखते हैं ना कि उनकी समृद्धि-सुरक्षा को मजबूत करने में। हमें सुरक्षा और समृद्धि के इस माहौल पर "स्वार्थी सियासत" को हावी होने से रोकना होगा।

श्री नक़वी ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों की राष्ट्रभक्ति और उनके द्वारा देश निर्माण के लिए किये गए कार्य को किसी के प्रमाण पत्र की जरुरत नहीं है, "वह इतिहास की सच्चाई है और वर्तमान की हकीकत"। अल्पसंख्यक, देश के विकास के बराबर के हिस्सेदार-भागीदार हैं। उनके इस जज़्बे का सम्मान करने की जरुरत है, उस पर प्रश्न चिन्ह लगाना उनकी राष्ट्रभक्ति के जुनून को ठेस पहुंचाना है।

श्री नक़वी ने कहा कि पिछले दिनों देश के कुछ स्थानों पर हुई अप्रिय घटनाएँ, देश के सौहार्दपूर्ण माहौल को ख़राब करने, विकास और विश्वास की रफ़्तार को रोकने की साजिश का हिस्सा हैं, मुट्ठी भर लोगों की इन हरकतों को परास्त करने की जरुरत है। इसके लिए एकजुटता और सौहार्द की ताकत जरुरी है। बिखराव-टकराव का रास्ता हमेशा शांति-सौहार्द और तरक्की के रास्ते का रोड़ा बनता है।

श्री नक़वी ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग का विकास हमारी सरकार का राष्ट्रधर्म है। "सबका साथ, सबका विकास" कोई राजनीतिक नारा नहीं है बल्कि यह हमारा संकल्प है, आखिरी व्यक्ति तक विकास की रौशनी पहुंचाने का लक्ष्य है।NDA सरकार के पिछले लगभग दो वर्षों के दौरान इसी संकल्प और जज़्बे के साथ मोदी सरकार ने अल्पसंख्यकों के सामाजिक-आर्थिक-शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए जो कदम उठाये हैं उनका असर जमीन पर दिखने लगा है।

श्री नक़वी ने कहा कि केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यकों के विकास के लिए "प्रधानमंत्री का नया 15-सूत्रीय कार्यक्रम", “बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (MSDP)”, ‘’मिशन सशक्तिकरण, ''सीखो और कमाओ'', ''उस्ताद'', ''हमारी धरोहर'', ''मानस'', ''नई मंजिल'', ''नई रौशनी'', छात्रों के लिए छात्रवृति, ''पढ़ो परदेस'', ''जियो पारसी'' जैसी योजनाएं शुरू की हैं। ये आखिरी व्यक्ति तक विकास की रौशनी पहुँचाने का मजबूत कदम हैं।

श्री नक़वी ने कहा कि "मिशन सशक्तिकरण" केंद्र सरकार का सभी वर्गों सहित अल्पसंख्यकों के आर्थिक-सामाजिक-शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है। "मिशन सशक्तिकरण" के अन्तगर्त उन्होंने अभी तक 19 राज्यों का दौरा किया है जिनमे केरल, हरयाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, जम्मू और कश्मीर,तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक, दिल्ली, राजस्थान शामिल हैं।

"मिशन सशक्तिकरण" के तहत देश के विभिन्न राज्यों के दौरों के बाद अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों की जरुरत के मुताबिक केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों को उन क्षेत्रों में विकास कार्यों हेतु पर्याप्त धन मुहैया करा रही है। इन दौरों से अल्पसंख्यकों की समस्याओं, उनकी जरूरतों की जमीनी हकीकत जानने में मदद मिली है।

श्री नक़वी ने कहा कि अल्पसंख्यकों के कल्याण को अमली जामा पहनाने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों को अरबों रूपए जारी किए हैं। यह धन "जन विकास कार्यक्रम"- बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (MSDP) और अन्य कार्यक्रमों के तहत जारी किया गया है। अल्पसंख्यकों के विकास हेतु राज्यों के साथ समन्वय कर युद्ध स्तर पर अभियान चलाया जायेगा।

श्री नक़वी ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा सत्ता के गलियारों से "सत्ता के दलालों" और "पावर ब्रोकर्स" के खात्मे का नतीजा है कि आज केंद्र सरकार द्वारा अल्संख्यक समुदाय सहित सभी गरीब वर्गों के लिए भेजे जाने वाले धन का एक-एक पैसा इन तबकों के कल्याण पर खर्च हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा शुरू की गई इन योजनाओं से अल्पसंख्यकों के बीच एक विश्वास, उम्मीद का मौहाल तैयार हुआ है।

श्री नक़वी ने कहा कि हमारी सरकार यह भरोसा दिलाती है कि किसी भी "नकारात्मक एजेंडे" को सुशासन-विकास के एजेंडे पर हावी नहीं होने दिया जायेगा। अल्पसंख्यकों के सुरक्षा, समृद्धि, सम्मान के मजबूत संकल्प के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। हमारी सरकार यह भी भरोसा दिलाती है की सभी वर्गों के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और संवैधानिक अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं।

श्री नक़वी ने कहा कि राज्य अल्पसंख्यक आयोगों का सम्मेलन इस लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विभिन्न राज्यों में अल्पसंख्यकों के सरोकार और उनके संवैधानिक अधिकारों के सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी राज्य अल्पसंख्यक आयोगों की होती है।