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नई दिल्ली, 19 फरवरी, 2016: एमिटी विश्वविद्यालय के “यूथ पार्लियामेंट- एमिटी मॉक पार्लियामेंट 2016” के अवसर पर मेरे भाषण के मुख्य अंश की प्रेस विज्ञप्ति:

केंद्रीय संसदीय एवं अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री श्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने आज कहा कि अलग-अलग सिद्धांतों और विचारधाराओं के बावजूद राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर अधिकाँश समय राजनीतिक दल एकजुट रहते हैं और यही भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की ताकत है।

नोएडा में एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी लॉ स्कूल द्वारा आयोजित "यूथ पार्लियामेंट-एमिटी मॉक पार्लियामेंट 2016" के अवसर पर सम्बोधित करते हुए श्री नक़वी ने कहा कि वाद-विवाद और चर्चा किसी भी संसदीय प्रजातंत्र का अभिन्न अंग हैं और "डिसेंट (मतभेद), डिसरप्शन और डिस्टर्बेंस" कभी भी "डिबेट, डिस्कशन और डिसीजन" पर हावी नहीं होने देना चाहिए।

श्री नक़वी ने कहा कि भारत विश्व की सबसे मजबूत और वाइब्रेंट प्रजातंत्र है। संसद प्रजातंत्र का सबसे बड़ा मंदिर होने के साथ-साथ, जन-आकाँक्षाओं को पूरा करने, जनता के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने और उनका समाधान करने की सबसे असरदार संवैधानिक संस्था है।

श्री नक़वी ने कहा कि संसद का प्रत्येक सदस्य लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। हर सांसद के साथ इन लाखों लोगों की उम्मीदे, आकांक्षाएं जुडी होती है। इसलिए इन जन-आकाँक्षाओं को पूरा करना हम सांसदों और चुने हुए प्रतिनिधियों का संवैधानिक धर्म है।

संसद सत्रों में गतिरोध पर चिंता जताते हुए श्री नक़वी ने कहा कि संसद और विशेषकर राज्यसभा में बेवजह के हंगामे के कारण जनता के हितों और देश की सामाजिक-आर्थिक तरक्की से जुड़े कई अहम "रिफार्म बिल" पास नहीं हो पा रहे हैं जिनमे रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) संशोधन विधेयक, 2013 और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शामिल हैं। संसद के पिछले दो सत्र- मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र- आधारहीन मुद्दों पर किये गए हंगामे की भेंट चढ़ गए।

21 जुलाई से 13 अगस्त 2015 तक चले मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा के 73 घंटे, 7 मिनट से ज्यादा का समय हंगामे की भेंट चढ़ गया। मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा की उत्पादकता सिर्फ 9 प्रतिशत रही। सांसद में जो काम हुआ भी उसमे अधिकांश "शार्ट-ड्यूरेशन डिस्कशन, कॉलिंग अटेंशन,जीरो ऑवर, प्राइवेट मेंबर बिज़नेस रहा", लेकिन "लेजिस्लेटिव बिज़नेस" (विधाई कार्य) ना के बराबर हो पाया। दो सत्रों को मिलाकर राज्यसभा में मात्र 9 बिल पास हुए या लोकसभा को लौटाए गए।

वहीँ लोकसभा का 34 घंटें, 32 मिनट से ज्यादा का समय बर्बाद हुआ। अनुमान के अनुसार लोकसभा की एक घंटे की कार्यवाही पर लगभग 1.5 करोड़ रूपए का खर्च आता है जो जनता की गाढ़ी कमाई में से ही खर्च होता है। राज्यसभा की एक घंटे की कार्यवाही पर लगभग 1.1 करोड़ का खर्च आता है।

शीतकालीन सत्र, जो नवम्बर 26 से 23 दिसंबर तक चला, के दौरान राज्यसभा के 56 घंटे और 39 मिनट हंगामे की भेंट चढ़े, वहीँ लोकसभा के 8 घंटे, 37 मिनट बर्बाद हुए।

इस तरह संसद के मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र के दौरान जहाँ राज्यसभा के बहुमूल्य लगभग 130 घंटे और 9 मिनट बर्बाद हुए वहीँ लोकसभा के लगभग 43 घंटे बर्बाद हुए। दोनों सत्रों को मिलाकर, राज्यसभा में हंगामे के कारण जनता के लगभग 143.36 करोड़ और लोकसभा में हंगामे के कारण लगभग 64.03 करोड़ रूपए बर्बाद हुए। केवल जनधन का नुक्सान ही नहीं बल्कि जनहित और जनसरोकार का भी नुक्सान हुआ।

श्री नक़वी ने कहा कि दोनों सदनों के बहुमूल्य समय का उपयोग जनता के हितों, किसानों, गरीबों, युवाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों और कमजोर तबकों के सरोकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने और देश की आर्थिक तरक्की से जुड़े विधेयकों को पारित किये जाने के लिए किया जा सकता था।

श्री नक़वी ने कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों से अपील करते हुए कहा कि इन दलों को देश की तरक्की से जुड़े विधेयकों को पास करने में केंद्र सरकार का सहयोग कर "रचनात्मक विपक्ष" की भूमिका निभानी चाहिए। विपक्ष को "डिसरप्टिव विपक्ष" नहीं बल्कि “कंस्ट्रक्टिव” (रचनात्मक) विपक्ष की भूमिका निभा कर देश के विकास का हिस्सेदार बनना होगा।

श्री नक़वी ने कहा कि पूरी उम्मीद है कि 23 फरवरी से शुरू होने वाला संसद सत्र रचनात्मक साबित होगा और कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष जनहित से जुड़े विधेयक पास करने में सरकार का सहयोग करेगा।

एमिटी विश्वविद्यालय को "मॉक पार्लियामेंट" का आयोजन करने के लिए सराहना करते हुए श्री नक़वी ने कहा कि युवा भारत का भविष्य हैं। उनके कन्धों पर देश की प्रजातांत्रिक, संसदीय एवं संवैधानिक परंपराओं और मूल्यों को मजबूत रखने की जिम्मेदारी है।

छात्रों और युवाओं को संसदीय कार्य प्रणाली की समझ रखनी चाहिए और उन्हें विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए। अन्य शैक्षणिक संस्थानों को इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए ताकि छात्र एवं देश के युवा हमारी संसदीय प्रणाली को अच्छी तरह जान सके, समझ सके।

श्री नक़वी ने कहा कि युवाओं को राजनीति में रूचि भी लेनी चाहिए और भाग भी लेना चाहिए क्योंकि भारतीय लोकतंत्र दुनिया की सबसे मजबूत ही नहीं बल्कि सुंदर व्यवस्था भी है, इसे युवाओं की हिस्सेदारी-भागीदारी और अधिक ताकतवर बनाएगी।