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नई दिल्ली, 17 फरवरी, 2016: दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय सुरक्षा एवं एकजुटता के समर्थन में आयोजित धरना के संबंध में प्रेस विज्ञप्ति:

केंद्रीय संसदीय एवं अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता श्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने आज यहाँ कहा कि जेएनयू तथा अन्य कुछ जगहों पर राष्ट्रविरोधी तांडव "ब्रेक इंडिया" और "बिल्ड इंडिया" की सोंच और संस्कृति के बीच संघर्ष है, लेकिन भारत को जोड़ने का संकल्प, देश को तोड़ने की साजिश का सूपड़ा साफ़ करेगा।

यहाँ जंतर-मंतर पर सांस्कृतिक एवं सामाजिक संगठन "लोक अभियान" द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा एवं देश की एकजुटता के समर्थन में आयोजित धरने को सम्बोधित करते हुए श्री नक़वी ने कहा कि, जेएनयू में कुछ "छात्रों" द्वारा जो देश-विरोधी कार्य किया गया, वह भारत की छवि को दुनिया भर में ख़राब करने की साजिश है।

श्री नक़वी ने कहा कि देश को तोड़ने या समाज की शांति, सौहार्द के माहौल को ख़राब कर देश की समृद्धि को नुक्सान पहुंचाने की साजिश कभी सफल नहीं होगी।

श्री नक़वी ने कहा कि अक्टूबर 2015 में भारत में संपन्न हुई “इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट”, जिसमें लगभग 52 देश शामिल हुए थे, के दौरान तथाकथित असहिष्णुता का मुद्दा उठा कर और "अवार्ड वापसी ड्रामा" चला कर देश को बदनाम करने की कोशिश की गयी थी। और अब जब मुंबई में "मेक इन इंडिया" पहल के तहत दुनिया भर से उद्योगपति और अन्य प्रतिनिधि आये हैं तब देश-विरोधी काम कर भारत की छवि को विश्व भर में धूमिल किये जाने की साजिश चल रही है। ऐसे तत्व देश की तरक्की, नौजवानों के रोजगार में रोड़ा पैदा करना चाहते हैं।

श्री नक़वी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग और राजनीतिक दल इस साजिश का समर्थन कर रहे हैं, ऐसे तत्वों का बचाव कर रहे हैं जो देश की बर्बादी की साजिश के हिस्सेदार हैं।

श्री नक़वी ने कहा कि देश की एकता और अखंडता जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को सुरक्षित रखने के लिए हम सब को एकजुट हो कर उन ताकतों के खिलाफ लड़ना होगा जो हमारे देश के हितों को नुक्सान पहुंचाने के इरादे से काम कर रही हैं।

श्री नक़वी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को जात-पात, धर्म-संप्रदाय और राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य से तथाकथित असहिष्णुता के मुद्दे पर देश के लोगों को भ्रमित कर पाने में असफल होने के बाद कांग्रेस और कुछ अन्य राजनीतिक दल अब शैक्षणिक संस्थानों का अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए दुरूपयोग कर रहे हैं। यह पार्टियां शैक्षणिक संस्थानों को अपनी संकीर्ण राजनीति का अखाड़ा बनाने का प्रयास कर रही हैं।

श्री नक़वी ने कहा कि हमारी सरकार में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित संविधान में दिए गए सभी नागरिक अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। लेकिन संविधान में दिए गए वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर राष्ट्रविरोध की स्वतंत्रता नहीं दी जा सकती।

श्री नक़वी ने कहा कि वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह बिलकुल नहीं है कि कोई हमारे देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता को चुनौती देने का काम करे। अफज़ल गुरु जैसे आतंकवादी को, जिसने भारत की एकता, अखंडता के खिलाफ काम किया और जिसे देश की पूरी न्याय प्रक्रिया का पालन किये जाने के बाद फांसी दी गयी, ऐसे व्यक्ति के समर्थन में नारे लगाना किस तरह की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। देश-विरोधी का समर्थन करना क्या देशद्रोह नहीं है? कश्मीर, जो की भारत का अभिन्न अंग है, उसकी "आजादी" के नारे लगाना क्या देशद्रोह नहीं है? "भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जारी" जैसे नारे लगाना क्या देशद्रोह नहीं है?

श्री नक़वी ने कहा कि जो दल ऐसे राष्ट्रविरोधी तत्वों का समर्थन कर रहे हैं, उनका बचाव कर रहे हैं, उन्हें देश के लोगों से माफ़ी मांगनी चाहिए और राष्ट्रीय हितों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार करना चाहिए।