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खम्भात (गुजरात), 14 फरवरी, 2016 प्रेस विज्ञप्ति:

खम्भात (गुजरात) में सम्पन्न सूफी सम्मेलन में आतंकवाद, ISIS के खिलाफ जंग का प्रस्ताव

गुजरात के खम्भात के अशरफनगर में पूरे देश और विश्व के कोने-कोने से इकठ्ठा हुए हजारों की संख्या में सूफी-संतों ने आतंकवाद एवं ISIS जैसे आतंकी संगठनों को इस्लाम और इंसानियत का दुश्मन घोषित करते हुए इन शैतानी ताकतों के खिलाफ जंग का ऐलान किया।

यहाँ सरकार शाह-ए-मीरान हज़रात पीर मीरान सैयद अली वली के 796वे वार्षिक उर्स मुबारक के दौरान आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सूफी सम्मेलन में हजारो की संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों की उपस्थिति में एक प्रस्ताव पारित कर कहा गया कि आज कुछ ताकतें इस्लाम को सुरक्षा कवच बना कर इंसानी वसूलों और इस्लामी मूल्यों का कत्लेआम कर रही हैं। हमें एकजुट होकर ऐसी ताकतों के खिलाफ खड़ा होना होगा और इनके शैतानी मंसूबों को नेस्तनाबूद करने का संकल्प लेकर दुनिया की शांति-सुकून की रक्षा करनी होगी।

इस अवसर पर उपस्थित केंद्रीय संसदीय एवं अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री श्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि सूफी-संतों की संस्कृति एवं संस्कार समाज में सद्भाव और शांति के लिए आज वक़्त की बड़ी जरुरत हैं। हमें अपनी इस सद्भाव से भरपूर सांस्कृतिक विरासत के संदेश को विश्व शांति स्थापित करने के लिए और आतंकवाद के खात्मे के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।

श्री नक़वी ने कहा कि आतंकवाद और कट्टरवाद विश्व शांति और तरक्की के लिए सबसे गंभीर चुनौती हैं। आतंकी समूहों का किसी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है, आतंकी समूह अपने शैतानी मंसूबों के लिए धर्म का दुरूपयोग कर रहे हैं, धर्म को अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित कर रहे हैं। यदि धार्मिक नेता और संगठन आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाएंगे तो आतंकी तत्व, धर्म को अपनी ढाल बना कर इंसानी मूल्यों के कत्लेआम के अपने इरादे में नाकाम हो जायेंगे। समाज में भाईचारे और एकता-सौहार्द की ताकत से ही देश की शांति और समृद्धि को नुकसान पहुचाने वाली शैतानी ताकतों को अलग-थलग कर उन्हें पराजित किया जा सकता है।

श्री नक़वी ने कहा कि हमें गर्व है कि गुजरात का बेटा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी आज दुनिया में विश्व शांति के मजबूत सर्व-स्वीकार्य नेता बन कर उभरे हैं। आज दुनिया, भारत के सूफी-संतों की शांति-सौहार्द की विरासत की प्रबल जरुरत महसूस कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इसी विरासत के "मजबूत संदेशवाहक" के रूप में दुनिया में शांति, सौहार्द,समृद्धि के मजबूत संदेशवाहक के रूप में उभरे हैं।

श्री नक़वी ने कहा कि आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ अभियान में सरकार से ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका समाज की है। आतंकवाद-कट्टरवाद के खिलाफ लड़ाई में धार्मिक नेता और धार्मिक-सामाजिक संगठन अहम भूमिका निभा सकते हैं। अपने प्रभाव का इस्तेमाल आम जनता, विशेषकर युवाओं में आतंकवाद और आतंकी समूहों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए किया जाना चाहिए। हमें समझना होगा कि आतंकवाद और उसे जुड़े ISIS और अल-कायदा जैसे संगठन इंसानियत और दुनिया की तरक्की के दुश्मन हैं।

श्री नक़वी ने कहा कि सभी धर्मों की विभिन्न संस्थाओं और धार्मिक गुरुओं को सामाजिक एकता और सौहार्द को मजबूत करने के लिए एक साथ मिलकर काम करना होगा। विभिन्न धर्मों के धार्मिक गुरुओं और संगठनों को एक ऐसा मंच तैयार करना चाहिए जो सभी धर्मों के बीच आपसी भाईचारे और सद्भाव-सम्मान की भावना को स्थापित करने का काम करे। देश में सौहार्द स्थापित करना, एक दूसरे के धर्म के प्रति सम्मान की भावना जगाना, किसी अप्रिय घटना के दौरान शांति बनाये रखना इस मंच की जिम्मेदारियों में शामिल किया जा सकता है।

श्री नक़वी ने कहा कि हमारी संस्कृति, संस्कार एवं संविधान, तीनो शांति-सौहार्द के साथ समृद्धि के रास्ते पर चलने का सन्देश हैं और इसी विरासत के चलते भारत दुनिया के तमाम देशों के लिए "आदर्श" प्रस्तुत कर रहा है, हमें इस विरासत की रक्षा करनी होगी। हमें सियासी शगूफ़ों के चलते देश की संस्कृति-संस्कार-संविधान के मूल्यों को कमजोर नहीं होने देना चाहिए।