Speeches



नई दिल्ली, 14 नवम्बर 2017:प्रगति मैदान में 14 से 27 नवम्बर 2017 तक लगाए जा रहे "हुनर हाट" के सम्बन्ध में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में मेरे सम्बोधन के मुख्य बिंदु:

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहाँ कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा आयोजित किये जा रहे "हुनर हाट", देश भर के हजारों हुनर के उस्ताद कारीगरों, दस्तकारों, शिल्पकारों और खानसामों को रोजगार और रोजगार के अवसर के साथ-साथ राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मार्किट मुहैय्या कराने का सफल मिशन साबित हुए हैं।

प्रतिष्ठित भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ), प्रगति मैदान- 2017 में 14 से 27 नवंबर तक लगाए जा रहे "हुनर हाट " पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में श्री नकवी ने कहा कि जहाँ एक तरफ देश के विभिन्न स्थानों पर लगाए जा रहे "हुनर हाट" से जरूरतमंद कारीगरों, दस्तकारों, शिल्पकारों को अपने हुनर को प्रदर्शित करने का मौका मिल रहा है वहीँ दूसरी तरफ उन्हें अपने सामान को बेचने के लिए घरेलु ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार भी उपलब्ध हुआ है। 
"हुनर हाट" का आयोजन अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की "उस्ताद" (विकास के लिए पारंपरिक कला/शिल्प में कौशल और प्रशिक्षण को अपग्रेड करना) योजना के तहत किया जाता है।

इस बार "हुनर हाट" का आयोजन प्रगति मैदान के हॉल नंबर-7 जी और 7-एच में किया जा रहा है। इस "हुनर हाट" में देश भर के 20 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र से अल्पसंख्यक समुदाय के 130 से अधिक कारीगर, दस्तकार, शिल्पकार भाग ले रहे हैं। इनमे लगभग 30 महिला दस्तकार भी शामिल हैं।

श्री नकवी ने कहा कि यह "हुनर हाट" कई मायनों में पहले आयोजित किये गए "हुनर हाट" से अलग है। इस "हुनर हाट" में दिल्ली की तिहाड़ जेल के कैदियों द्वारा बनाये गए हस्तनिर्मित सामान भी प्रदर्शित किये जा रहे हैं जिनमे फर्नीचर, बेकरी के सामान, हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम, हाथ से निकाले गए तेल, ऑर्गेनिक मसाले, अनाज, हैंडलूम शामिल हैं।

इस "हुनर हाट" में देश के कोने-कोने से आये दस्तकारों द्वारा हस्तशिल्प एवं हथकरघा के बेहतरीन उत्पाद जैसे असम के बेंत एवं बांस एवं जूट उत्पाद; भागलपुर का टसर,गीजा,मटका सिल्क; राजस्थान एवं तेलगांना की परंपरागत लाख की चूड़ियाँ एवं गहने; पश्चिम बंगाल का कांथा वर्क; वाराणसी के जरीदार वस्त्र; यू.पी. से लखनवी चिकन वर्क व जरी जरदोजी; खुर्जा के चीनी मिट्टी के उत्पाद, उत्तर-पूर्व की चिकनी मिट्टी की वस्तुएँ, काले पत्थर के बर्तन, ड्राय फ्लावर एवं हस्तशिल्प उत्पाद; कश्मीर से शाल, कारपेट एवं कागज से बनी वस्तुएँ; गुजरात का मुतवा, कच्छ कढ़ार्इ एवं बंधेज;मध्य-प्रदेश की बाटिक/बाघ/महेश्वरी; बाड़मेर का गोटा एवं अजरक; मुरादाबाद की ब्रास की वस्तुएँ, चमड़े के उत्पाद; तेलंगाना की कलमकारी आदि को प्रदर्शित किया जा रहा है। "हुनर हाट" में पुडुचेरी और उत्तर प्रदेश के दस्तकारों द्वारा प्राकृतिक घास से बनार्इ गर्इ टोकरियाँ, राजस्थान से गोट्टापत्ती वर्क, गुजरात से भित्ति चित्रों (मुरल पेंटिंग) और बांधेज आदि नए-नए उत्पाद भी लाये गए हैं।

श्री नकवी ने कहा कि इससे पूर्व अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा "हुनर हाट" का आयोजन दिल्ली में प्रगति मैदान, बाबा खड़क सिंह मार्ग और पुड्डुचेरी में किया गया था। आने वाले दिनों में "हुनर हाट" का आयोजन मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, भोपाल आदि स्थानों पर किया जायेगा। इसके अलावा सभी राज्यों में "हुनर हब" की स्थापना किये जाने की योजना पर काम चल रहा है। इन "हुनर हब" में कारीगरों को वर्तमान की जरुरत के हिसाब से प्रशिक्षण भी दिया जायेगा।

इस "हुनर हाट" में आंध्र प्रदेश (2), असम (2), बिहार (4), दिल्ली (24), गुजरात (11), जम्मू और कश्मीर (9), झारखण्ड (1), कर्नाटक (4), मध्यप्रदेश (5), मणिपुर (1), मिजोरम (1), नागालैंड (4), पुड्डुचेरी (3), पंजाब (2), राजस्थान (12), तमिलनाडु (1), तेलंगाना (2), उत्तर प्रदेश (37), उत्तराखंड (1) और पश्चिम बंगाल (4) के दस्तकार, कारीगर, शिल्पकार शामिल हुए हैं।