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नई दिल्ली, 07 जनवरी 2017: नई दिल्ली में आल इंडिया वक्फ कांफ्रेंस के दौरान मेरे संबोधन के मुख्य अंश:

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहाँ कहा कि केंद्र सरकार, नेशनल वक्फ डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (नवाड़को) और वक्फ कौंसिल मिल कर वक्फ संपत्तियों का मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक-शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए इस्तेमाल किये जाने का अभियान युद्ध स्तर पर चला रहे हैं।

नई दिल्ली में आल इंडिया वक्फ कांफ्रेंस में श्री नकवी ने कहा कि मुझे खुशी है कई राज्य सरकारें वक्फ संपत्तियों का मुस्लिम समाज के सशक्तीकरण के लिए इस्तेमाल किये जाने को लेकर आगे आ रही हैं। कई राज्य इस मामलें में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।

श्री नकवी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि सभी वक्फ बोर्ड एवं वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड कंप्यूटराइज्ड हो जाएँ। अल्पसंख्यक मंत्रालय इस सन्दर्भ में राज्य वक्फ बोर्डों को हर संभव मदद दे रहा है। कंप्यूटराईज़ेशन से वक्फ बोर्डों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय मुस्लिम समुदाय के विकास के लिए विभिन्न स्तर पर काम कर रहा है। इसमें वक्फ संपत्तियों का संरक्षण और विकास अहम है। कुछ राज्यों के वक्फ बोर्डों पर "वक्फ माफियाओं" ने कब्ज़ा जमा लिया है जिसके चलते वक्फ संपत्तियों का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।

वक्फ संपत्तियों को "वक्फ माफियाओं के चंगुल से छुड़ाने के लिए हमने युद्ध स्तर पर अभियान चलाया है जिसके सकारात्मक नतीजे आने शुरू हो गए हैं। पर कुछ वक्फ बोर्डों में कुछ गंभीर गड़बड़ी के मामले भी सामने आये हैं जिसकी जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसियों को सौंपे जाने पर विचार हो रहा है।

श्री नकवी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों की शिकायतों के लिए केंद्र स्तर पर एक सदस्यीय "बोर्ड ऑफ़ एडजूडिकेशन" का गठन किया गया है जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के रिटायर्ड जस्टिस करेंगे। इसी तरह राज्यों में 3 सदस्यीय न्यायाधिकरण की स्थापना की जा रही है। लगभग 24 राज्यों में इनका गठन किया जा चुका है। अन्य राज्य भी इसका गठन शीघ्र करें। पंजीकृत और गैर-पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की संख्या लगभग 4,49,314 है। रिकॉर्डों के कंप्यूटराईजेशन के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।

2006 के अनुसार स्टेट वक्फ बोर्डों की वार्षिक आय केवल 163 करोड़ रूपए थी जबकि वक्फ संपत्तियों की कीमत लगभग 1.2 लाख करोड़ आंकी गई। वक्फ संपत्तियों का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाये तो लगभग 12 हजार करोड़ की वार्षिक आमदनी अर्जित की जा सकती है। यह पैसा मुस्लिम समुदाय के बेहतर भविष्य के काम में लगाया जा सकता है।

श्री नकवी ने कहा कि वक्फ जमीनों पर अल्पसंख्यक मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ मिलकर स्कूल, कॉलेज, मॉल, अस्पताल, कौशल विकास केंद्र आदि का निर्माण कराएगा, और इससे हुई आमदनी को मुस्लिम समुदाय की शिक्षा और अन्य विकास कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा।

इन जमीनों पर विभिन्न प्रयोजन के सामुदायिक केंद्र "सद्भाव मंडप" का निर्माण भी किया जायेगा जो विभिन्न प्रकार के कार्यों जैसे शादी-विवाह, प्रदर्शनी और किसी आपदा के समय राहत केंद्र के रूप में भी इस्तेमाल किये जा सकेंगे।

श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यकों, गरीबों, कमजोर तबकों के विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है लेकिन योजनाओं का लाभ और उनका असर कागजों और कम्प्यूटर पर नहीं बल्कि जमीन पर दिखना चाहिए। कल्याणकारी योजनाएं "कागजों का किस्सा" नहीं बल्कि "विकास का हिस्सा" बननी चाहिए। अफसरों को खुद गांव-गांव जाना चाहिए ताकि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे हर जरूरतमंद तक पहुँचाने की प्रक्रिया की निगरानी की जा सके।

श्री नकवी ने कहा कि इस दिशा में "प्रोग्रेस पंचायत" महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अल्पसंख्यक मंत्रालय "सीखो और कमाओ", "नई मंजिल", "नई रौशनी", "उस्ताद" जैसी कल्याणकारी योजनाओं को अल्पसंख्यकों की तरक्की की गारंटी बनाने की ईमानदार कोशिश कर रहा है।

इसके अलावा "प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम" (MsDP) जैसे कार्यक्रम अल्पसंख्यकों को आधारभूत सुविधाएँ जैसे स्कूल, अस्पताल, सड़क आदि इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया करा रहा है। रोजगारपुरक योजनाएं हमारी प्राथमिकता हैं और इस सन्दर्भ में युद्ध स्तर पर काम हो रहा है। "हर हाथ को रोजगार" हमारा लक्ष्य है।

आल इंडिया वक्फ कांफ्रेंस में लगभग 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सीईओ, अध्यक्ष और अन्य अधिकारी शामिल हुए।