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त्रिचूर (केरल), 27 दिसंबर 2016: आज केरल के त्रिचूर में क्रिसमस समारोह "ब्यून नेटल" के उद्धघाटन के दौरान मेरे संबोधन के मुख्य अंश:

 केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहाँ कहा कि “सौहार्द, सामाजिक एकता और सहिष्णुता” भारत का “डीएनए” है और यही भारत की शानदार सांस्कृतिक विरासत का "यूएसपी" है।

त्रिचूर में बड़ी संख्या में समाज के सभी वर्गों के लोगों की उपस्थिति में क्रिसमस समारोह और नए साल के जश्न के अंतरगर्त आयोजित "ब्यून नेटल" (दुनिया भर में सांता क्लाज़ का सबसे बड़ा संगम) समारोह एवं जुलूस का उद्घाटन करते हुए श्री नकवी ने कहा कि भारत का सदियों पुराना इतिहास इस बात का गवाह है कि लाखों कोशिशों के बावजूद हमारी इस शानदार विरासत को कोई नुकसान नहीं पहुँचा पाया। बल्कि ऐसी कोशिश करने वाली ताकतों को देश के लोगों ने परास्त किया है।

"ब्यून नेटल" को दुनिया में सांता क्लाज़ की वेशभूषा में एकत्रित लोगों के सबसे बड़े समारोह के रूप में गिनीज़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में जगह मिली है। श्री नकवी ने कहा कि अलग-अलग धर्मों, भाषाओँ और संस्कृति के बावजूद भारत में सामाजिक सौहार्द, एकता और सहिष्णुता का ताना-बाना सदियों से मजबूत होता रहा है और अनेकता में एकता का भारतीय डीएनए बरकार रहा है।

त्रिचूर के कैथोलिक आर्क डायसिस द्वारा आयोजित समारोह में श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय "सद्भाव समागम", "प्रोग्रेस पंचायत", "हुनर हाट" आदि के माध्यम से अल्पसंख्यकों से सीधा संपर्क-संवाद कर रहा है और अल्पसंख्यकों के विकास और विश्वास के माहौल को मजबूत कर रहा है। श्री नकवी ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का मूल्यांकन लोगों को हमारे काम से करना चाहिए ना कि हमारे खिलाफ चलाये जा रहे दुष्प्रचार से।

श्री नकवी ने कहा कि भारत सांप्रदायिक और सामाजिक सौहार्द, एकता, सहिष्णुता और अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए दुनिया भर के लिए एक श्रेष्ठ उदाहरण है। भारत "सामाजिक सौहार्द और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का चैंपियन है"। श्री नकवी ने कहा कि भारत में सांस्कृतिक सौहार्द, सामाजिक सौहार्द का "पासवर्ड" है। बिना सांस्कृतिक सौहार्द के सामाजिक सौहार्द पूरा नहीं हो सकता। हमारा देश विभिन्न भाषाओँ, धर्मों, क्षेत्रों, संस्कृतियों और संस्कारों के बावजूद भी एक सूत्र में अगर बंधा है तो इसका प्रमुख कारण "सांस्कृतिक सौहार्द" है। यह सूत्र हिंदुस्तान को "अनेकता मे एकता" के सांस्कृतिक सूत्र में पिरोता है। इसी अनेकता में एकता को हम "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद" कहते हैं।

श्री नकवी ने कहा कि सांस्कृतिक सौहार्द हमें धार्मिक संकीर्णता और बिखराव-टकराव के रास्ते से बचाता ही नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द को मजबूत भी करता है। हमें हर कीमत पर देश के सामाजिक सौहार्द, एकता, सहिष्णुता के ताने-बाने को सुरक्षित रखना होगा, इसे और मजबूत करना होगा। इस काम में देश के हर धर्म, हर क्षेत्र, हर संस्कृति, हर समुदाय को एक होकर आगे बढ़ना होगा। भारत को दुनिया भर के लिए सामाजिक एकता की मिसाल बनाना होगा।

मार एंड्रयूज़ थैझाथ, आर्क बिशप त्रिचूर डायसिस और "ब्यून नेटल" की सराहना करते हुए श्री नकवी ने कहा कि यह कार्यक्रम सांस्कृतिक सौहार्द, सहिष्णुता, भाईचारे और सामाजिक एकता का संगम है। यह संगम हमारे देश की शानदार सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करेगा। समारोह एवं जुलूस की शुरुआत संत थॉमस कॉलेज ग्राउंड से हुई। समाज के हर वर्ग के लोग इस रंगारंग जुलूस में शामिल हुए। शहर भर से होता हुआ जुलूस संत थॉमस कॉलेज ग्राउंड पर ही खत्म हुआ। भारत की शानदार सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करती रंग बिरंगी झांकियां, मोटरसाइकिल जुलूस, बैंड-बाजें, नृतक एवं कई सांता क्लाज़ इस समारोह का आकर्षण रहें।

इससे पूर्व आज दिन में श्री नकवी ने कोच्चि में जॉर्ज एलेंचेरी, हिज़ ग्रेस कार्डिनल एवं मेजर आर्कबिशप ऑफ़ एर्नाकुलम से भेंट की और ईसाई समुदाय के विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा की। श्री नकवी ने कहा कि मोदी सरकार विकास की रौशनी को हर समुदाय तक पहुँचाने के लिए ईमानदार प्रयास कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोई भी "नकारात्मक एजेंडा" हमारे विकास के एजेंडे को प्रभावित नहीं कर सकता।