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नई दिल्ली, 11 नवम्बर, 2016 : नई दिल्ली में भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) 2016 में आयोजित होने वाले "हुनर हाट" के सम्बन्ध में मेरी प्रेस वार्ता:

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहाँ कहा कि 14 से 27 नवम्बर से प्रगति मैदान में लग रहे भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) 2016 में आयोजित होने वाले "हुनर हाट" में देश भर से 184 से अधिक दस्तकार, शिल्पकार अपने शानदार स्वदेशी हुनर का जलवा बिखेरेंगे।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए श्री नकवी ने कहा कि "हुनर हाट" का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के शिल्पकारों/दस्तकारों को राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय बाजार मुहैय्या करा कर "हुनर को हौसला" देना है। "हुनर हाट" में पहली बार देश के 26 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के दूर-दराज क्षेत्रों के शिल्पकारों-दस्तकारों को अपनी कला-कौशल का जलवा दिखाने का मौका मिलेगा, हुनर के उस्तादों की कला और कौशल का अद्भुत संगम होगा।

इस प्रदर्शनी को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की "उस्ताद" (विकास के लिए पारंपरिक कला-शिल्प के कौशल का उन्नयन और प्रशिक्षण) योजना के तहत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) द्वारा प्रगति मैदान के हॉल न. 14 में आयोजित किया जायेगा।

श्री नकवी ने कहा कि इस "हुनर हाट" की विशेषता यह है कि कलाकारों-दस्तकारों को अल्पसंख्यक मंत्रालय निःशुल्क स्टाल ही नही मुहैया कराएगा, बल्कि उनके आने-जाने का खर्च और प्रतिदिन खर्च के लिए भी सहायता मुहैया करायेगा, ताकि दूर-दराज से भी आने वाले गरीब पर हुनरमन्द शिल्पकार आसानी से इस बड़े मंच पर अपने कला के कौशल और हुनर को प्रदर्शित कर सकें।

इस प्रदर्शनी में जहां पूर्वोत्तर राज्यों में बनने वाली बेंत-बांस की कलाकृतियां होंगी, वहीं उत्तर प्रदेश में ब्रास, कपड़ा-कालीन, चिकन एवं जरदोजी की शानदार सामग्री होगी, दक्षिण राज्यों से मिट्टी के बनने वाले बर्तनों का व्यापक कलेक्शन होगा, चन्दन की लकड़ी की कलाकृतियां होंगी, झारखण्ड-बिहार के हस्त निर्मित कलाकृतियां और बॅंगाल-उड़ीसा के घरेलू इस्तेमाल के स्वदेशी सामान, साथ ही देश में बन रहे नीम-एलोविरा, तुलसी और हर्बल सौन्दर्य एवं स्वास्थ सामग्री होगी।

राजस्थान के मार्बल की कलाकृतियां होंगी, तो गुजरात की दिलकश हस्तनिर्मित सामग्री ’’हुनर हाट” में रहेगी, कश्मीर की पश्मीना और ब्रान्ज के बर्तन दिखेगें। भारत की सदियों पुरानी आयुर्वेदिक, यूनानी, स्वास्थ सामग्री भी दिखेगी। यही नहीं दस्तकार, शिल्पकार जिस प्रकार से अपने गांव-कस्बों में इन हस्त निर्मित सामग्री का निर्माण करते हैं, उसका भी प्रदर्शन लोगों के सामने करेंगे।
श्री नकवी ने कहा कि "उस्ताद" योजना का लक्ष्य अल्पसंख्यक समुदायों की पारंपरिक कला और शिल्प की समृद्ध विरासत का संरक्षण और उसे बढ़ावा देना है।

आज ग्लोबलाइजेशन और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा की वजह से सालों पुरानी शिल्प की कारीगरी का रोजगार धीरे-धीरे लुप्त होता जा रहा है। इन कारणों से शिल्प उस्तादों के साथ-साथ उनके बच्चे इस कार्य के प्रति उदासीन और हतोत्साहित होते जा रहे हैं और वे अपनी आजीविका के लिए नए रास्ते तलाशने पर मजबूर हो गए हैं। अल्पसंख्यक मंत्रालय बेहतर मार्किट लिंकेज, नए डिजाइन, बेहतर पैकेजिंग, प्रशिक्षण एवं क्रेडिट लिंकेज के माध्यम से इस कला को संरक्षित करने की कोशिश कर रहा है।

श्री नकवी ने कहा कि उन्होंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर आग्रह किया था कि वो अपने-अपने राज्यों के शिल्पकारों/दस्तकारों को "हुनर हाट" में आने के लिए प्रोत्साहित करें। दस्तकारों के चयन के लिए देश के विभिन्न राज्यों के अखबारों में क्षेत्रीय भाषाओं में भी विज्ञापन जारी किए गए थे।

एनएमडीएफसी ने भी अपनी राज्य चैनेलाइजिंग एजेंसियों से विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा बनाए जाने वाली विभिन्न कलाओं/शिल्पकारी विशेषकर "क्राफ्ट कलस्टरों" के दस्तकारों की पहचान कर उनको प्रायोजित करने का अनुरोध किया था।

श्री नक़वी ने कहा कि हमारे द्वारा किए गए प्रयासों के बहुत अच्छे परिणाम सामने आए और 500 के लगभग आवेदन प्राप्त हुए। राज्य सरकारों और एनएमडीएफसी की राज्य चैनेलाइजिंग एजेंसियों ने भी लगभग 240 दस्तकारों के आवेदन भेजे। इस प्रकार कुल मिलाकर 740 के आसपास आवेदन प्राप्त हुए थे। प्राप्त आवेदनों की सावधानी से जांच करने एवं विचार-विमर्श करने के बाद "हुनर हाट" प्रदर्शनी के लिए 184 से अधिक दस्तकारों/शिल्पकारों को चुना गया है जो लगभग 100 स्टॉलों में अपनी कला-कौशल का प्रदर्शन करेंगे।

इन चुने गए दस्तकारों में 26 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 5 अल्पसंख्यक समुदाय के राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता भी शामिल हैं।

इन राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में उत्तर प्रदेश (41), गुजरात (18) दिल्ली (17), जम्मू और कश्मीर (16), राजस्थान (13), पश्चिम बंगाल (9) बिहार (7) शामिल हैं। इसके अलावा लेह-लद्दाख से लेकर मणिपुर, नागालैंड, से लेकर केरल तक के दस्तकार/शिल्पकार शामिल हैं।

"हुनर हाट" में एक विशेष पवेलियन बनाया गया है जहाँ अल्पसंख्यक मंत्रालय की योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में बताया जाएगा।

श्री नकवी ने इस अवसर पर "हुनर हाट" के "लोगो" को लांच भी किया। भविष्य में होने वाली सभी प्रदर्शनियों में ब्रांडिंग के लिए इसी "लोगो" का इस्तेमाल किया जाएगा।