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नई दिल्ली, 01 नवम्बर, 2016: नई दिल्ली में “इंडिया हारमनी फाउंडेशन” के कार्यक्रम की मेरी प्रेस विज्ञप्ति:

केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहाँ कहा कि भारत में सांस्कृतिक सौहार्द, सामाजिक सौहार्द का "पासवर्ड" है। बिना सांस्कृतिक सौहार्द के सामाजिक सौहार्द पूरा नहीं हो सकता।

“इंडिया हारमनी फाउंडेशन” के एक कार्यक्रम "शून्यता" के अवसर पर श्री नकवी ने कहा कि हमारे देश की शानदार सांस्कृतिक विरासत को संजोने भर से काम नहीं चलेगा बल्कि उसे संवारने और नई पीढ़ी को वर्तमान की सोंच-समझ के साथ बताने-दिखाने की जरुरत है।

श्री नकवी ने कहा कि हमारा देश विभिन्न भाषाओँ, धर्मों, क्षेत्रों, संस्कृतियों और संस्कारों के बावजूद भी एक सूत्र में अगर बंधा है तो इसका प्रमुख कारण "सांस्कृतिक सौहार्द" है। यह सूत्र हिंदुस्तान को "अनेकता मे एकता" के सांस्कृतिक सूत्र में पिरोता है। इसी अनेकता में एकता को हम "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद" कहते हैं।

भारत में सैंकड़ों भाषाएँ, एक दर्जन से ज्यादा धार्मिक आस्थाओं, 29 राज्य 7 केंद्र शासित राज्यों के अलग-अलग रहन-सहन, खान-पान वेश-भूषा के बावजूद हम एक सूत्र में बंधे हैं तो उसका सीधा श्रेय हमारे "सांस्कृतिक सौहार्द" और "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद" को जाता है। श्री नकवी ने कहा कि सांस्कृतिक सौहार्द हमें धार्मिक संकीर्णता और बिखराव-टकराव के रास्ते से बचाता ही नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द को मजबूत भी करता है।

श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय ने तय किया है कि मंत्रालय पूरे देश में "सांस्कृतिक सौहार्द समागम" का आयोजन करेगा जिसमे अलग-अलग संस्कृति-कला के माध्यम से समाज को रूबरू कराया जायेगा। अगले वर्ष से यह "सांस्कृतिक सौहार्द समागम" दिल्ली, मुम्बई, हैदराबाद, लखनऊ, कोलकाता और बंगलुरु आदि स्थानों में किया जायेगा।

श्री नकवी ने कहा कि सांस्कृतिक, सामाजिक और धार्मिक सौहार्द भारत की ताकत है और हमें इस एकता के ताने-बाने को और मजबूत करने के लिए ईमानदार प्रयास करने होंगे। अनेकता में एकता और सांस्कृतिक-सामाजिक-धार्मिक विविधता की ताकत के कारण ही भारत दुनिया का सबसे खूबसूरत एवं संस्कारी लोकतंत्र है।

श्री नकवी ने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी, गुजरात से आसाम तक फैले हुए 29 राज्यों एवं 7 केन्द्र शासित प्रदेशों की अलग बोली अलग पहनावे खाने पीने के ढंग एक ही देश में पूरे विश्व में शायद ही और कहीं देखने को मिले। अनेकता में एकता के इसी संगम को प्रस्तुत करने का श्रेय भी "इण्डिया हारमोनी फाउंडेशन" और "असावरी" को जाता है जो आज के कार्यक्रम ‘‘शून्यता” के द्वारा प्रस्तुत किया गया।

श्री नकवी ने कहा कि "शून्यता" जैसे कार्यक्रम जो ग्रैमी अवार्ड के विजेताओं और पालपुंग शेरबलिंग बौद्ध मठ के भिक्षुओं द्वारा प्रस्तुत किया गया, समाज में सौहार्द, सद्भावना, शांति, समृद्धि को मजबूत बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। श्री नकवी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम हमें अपने देश की संस्कृति को समझने में मददगार साबित होते हैं। आज के दौर में हमें आधुनकिता को तो अपनाना ही है लेकिन साथ ही देश की संस्कृति की जड़े भी मजबूत रखनी है। जो समाज अपने देश की संस्कृति से दूर हो जाये वो कभी तरक्की नहीं कर सकता।

इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए पूर्व कैबिनेट सचिव ज़फर सैफुल्लाह द्वारा स्थापित "इंडिया हारमनी फाउंडेशन" को बधाई देते हुए श्री नकवी ने कहा कि यह संस्था समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सौहार्द कायम रखने, राष्ट्रीय एकता के विचार को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।