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नई दिल्ली, 05 अक्टूबर 2016: नई दिल्ली में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के 9वे वार्षिक व्याख्यान के दौरान केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी के संबोधन के मुख्य अंश: 

 केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहाँ कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकार दुनिया में किसी भी लोकतान्त्रिक देश से ज्यादा सुरक्षित और मजबूत हैं। पिछले ढाई वर्षों के शासनकाल में हमने अल्पसंख्यकों में बराबरी का एहसास पैदा करने के लिया काम किया है। 

"भारत में अल्पसंख्यक अधिकार एवं लोकतंत्र" विषय पर आयोजित राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के 9वे वार्षिक व्याख्यान के दौरान श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यकों, कमजोर तबकों, पिछड़ों, दलितों की गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा को किसी वर्ग की नहीं बल्कि हमने देश की समस्या के साथ जोड़ा है, जिसका नतीजा है कि गरीबों के विकास के लिए सरकार की सभी योजनाओं का सीधा लाभ जरूरतमंदों को मिल रहा है। 

श्री नकवी ने कहा कि "प्रधानमंत्री जन धन योजना", "उज्ज्वला योजना", हर गांव में बिजली की "दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना", छात्र-छात्राओं के लिए स्कालरशिप, रोजगार पूरक "कौशल विकास योजना", युद्ध स्तर पर तैयार हो रहे स्वास्थ्य केंद्र, शैक्षिक संस्थान, किसानों की आय दोगुनी करने की योजना, बीमा योजना, "मुद्रा योजना", स्वरोजगार योजना,  आदि का लाभ गरीब अल्पसंख्यकों को भी बराबरी के साथ मिल रहा है। अल्पसंख्यकों को अल्पसंख्यक मंत्रालय की योजनाओं- "प्रधानमंत्री का नया 15 सूत्रीय कार्यक्रम", "नई मंजिल", "नई रौशनी", "सीखो और कमाओं", "उस्ताद", " प्री-मेट्रिक, पोस्ट-मेट्रिक छात्रवृति- का भरपूर लाभ मिल रहा है। इसके अलावा केंद्र की अन्य योजनाओं जैसे "मेक इन इंडिया", "स्किल इंडिया", “स्टार्ट अप इंडिया" का लाभ अल्पसंख्यकों को भी मिल रहा है।           

श्री नकवी ने कहा कि केंद्र की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के लिए विकास का पैमाना गरीबी, पिछड़ापन और अशिक्षा को दूर करना है और बिना किसी भेदभाव के जरूरतमंदों को विकास योजनाओं का लाभ मिले यह हमारी प्राथमिकता है। अल्पसंख्यकों के "विकास और विश्वास" के बीच "राजनीतिक स्वार्थों की खाई" को मिटा कर उन्हें बराबरी का एहसास कराना होगा। हमें समाज के सभी वर्गों के बीच सद्भाव के साथ विकास के ऐजेंडे को आगे बढ़ाना होगा। मोदी सरकार के लिए विकास कोई "सियासी सौदा" नहीं बल्कि "सुशासन का मसौदा" है।   

श्री नकवी ने कहा कि “आजादी के पहले की मिली विरासत बांटों और राज करो" को कुछ लोगों और कुछ राजनीतिक दलों ने अब तक "सहेज और संजों" कर रखा है। जिसका नतीजा है कि अल्पसंख्यक प्रगति की मुख्यधारा से कोसों दूर हो गए और "सियासी चतुराई के चक्रव्यूह" में फंसते गए। हमें "स्वार्थी सियासी चक्रव्यूह" से उन्हें बाहर निकाल कर विकास के ताने-बाने के करीब लाना होगा। “विकास का ऐजेंडा” ही किसी भी प्रकार के "नकारात्मक और डेस्ट्रकटिव ऐजेंडे" को "डिफीट" दे सकता है।  

देश में अल्पसंख्यकों की जनसंख्या लगभग 23.4 करोड़ है जो कुल आबादी का लगभग 19.32 प्रतिशत है। श्री नकवी ने कहा कि भारत में दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की संवैधानिक गारंटी है जिसे कोई भी सरकार या सियासी दल कमजोर नहीं कर सकता। भारत में समाज के हर तबके के सामाजिक, धार्मिक अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं और इसका सबसे बड़ा कारण है भारत का महान संविधान और समाज का संस्कार। हमें सौहार्द के संस्कार को मजबूत करना होगा।

श्री नकवी ने कहा कि जहाँ पहले गरीबों की भलाई के लिए दिया गया पैसा बिचौलियों और "सत्ता के दलालों" की जेब में जाता था वहीँ मोदी सरकार में "बिचौलियों की नाकेबंदी" से कल्याणकारी योजनाओं का 100 प्रतिशत लाभ सीधा जरूरतमंदों तक पहुँच रहा है। इसी वजह से "बिचौलियों में बेचैनी" साफ नजर आ रही है।  

श्री नकवी ने कहा कि हमें लोगों के बीच जाना होगा। विकास योजनाओं की जमीनी सच्चाई का एहसास कागज़-कम्प्यूटर से नहीं बल्कि लोगों के बीच जाने से, ग्राउंड पर काम करने से होगा। अल्पसंख्यकों के विकास के लिए शुरू योजनाओं को लोगों के बीच सीधे ले जाने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय ने "प्रोग्रेस पंचायत" शुरू की है जिसका मकसद योजनाओं को "कागज-कंप्यूटर" से निकाल कर जमीनी हकीकत में बदलना है। "प्रोग्रेस पंचायत" की शुरुआत 29 सितंबर को हरियाणा के मेवात क्षेत्र में हुई जहाँ 4 "प्रोग्रेस पंचायतें" हुई जिसका जनता ने तहे दिल से स्वागत किया। लोगों में इस बात का संतोष साफ दिखा कि सरकार उनके बीच उनकी समस्या सुनने, समाधान करने आई है। देश भर में लगभग 96 और ऐसी "प्रोग्रेस पंचायत" होंगी। इसके अलावा वक़्फ सम्पतियों को "वक़्फ माफिया" के कब्जे से छुड़ाना, इन सम्पतियों का मुसलमानों के सशक्तिकरण के लिए इस्तेमाल करना कुछ ऐसे कदम हैं जिनसे मुस्लिम वर्ग में "विकास और विश्वास का माहौल" बना है।  

श्री नकवी ने कहा कि एनडीए सरकार के पिछले लगभग 28 महीनों में सांप्रदायिक घटनाओं में भारी कमी आई है। इसका कारण है कि मोदी सरकार "अपीज़मेंट पॉलिटिक्स” नहीं बल्कि "एम्पावरमेंट पॉलिटिक्स" और "तुष्टिकरण के बिना सशक्तिकरण” में विश्वास रखती है। सांप्रदायिक सौहार्द समाज की समृद्धि की गारंटी है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को जहाँ 2013-14 में 2638 शिकायतें मिली, 2014-15 में 1995 शिकायतें मिली, 2015-16 में 1974 और 2016-17 (20 अप्रैल 2016 तक) केवल 97 शिकायतें मिली हैं। हम चाहते हैं कि इस प्रकार की एक भी घटना ना हो जिससे सांप्रदायिक सौहार्द के ताने-बाने को नुकसान पहुंचे। 

श्री नकवी ने कहा कि चाहे वह देश की आंतरिक सुरक्षा हो, अर्थव्यवस्था हो, सामाजिक सद्भाव और सौहार्द का ताना-बाना हो, देश की सीमाएं हों, सभी प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व और देश के लोगों की एकता की ताकत से पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसकी झलक पूरी दुनिया ने देखी है। श्री नकवी ने कहा कि देश के विकास के ऐजेंडे को नुकसान पहुँचाने की किसी भी साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जायेगा। भारत की सुरक्षा पर बुरी नजर रखने वाली आतंकी ताकतों और उनके संरक्षकों को हर हाल में परास्त किया जायेगा।     

श्री नकवी ने कहा कि हमें सतर्क रहना होगा ताकि शांति, समृद्धि, सौहार्द के दुश्मन अपने मंसूबों में कामयाब ना होने पाएं। हमें धर्म को अपना सुरक्षा कवच बना कर शांति और पूरी इंसानियत के लिए खतरा बन रही ताकतों के खिलाफ एकजुट हो कर लड़ना होगा। आतंकवाद और आतंकियों के संरक्षकों को दुनिया में अलग-थलग करना होगा। श्री नकवी ने कहा कि जो लोग धर्म को अपना सुरक्षा कवच बना कर शैतानी खेल खेल रहे हैं वो असल में समाज, धर्म,  इंसानियत के सबसे बड़े दुश्मन हैं और इनका खात्मा दुनिया के अमन और इंसानियत के लिए बहुत जरुरी है।