नई दिल्ली, 20 जुलाई 2020:  आज दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर प्रोफेशनल डेवलपमेंट इन हायर एजुकेशन के कार्यक्रम में "राष्ट्र एवं पीढ़ी के निर्माण में पत्रकारिता, मीडिया और सिनेमा की भूमिका" पर वर्चुअल कांफ्रेंस के जरिये सम्बोधित किया।
समाज के किसी हिस्से का सुधार "नियमों में जकड़" से नहीं बल्कि "नियत की पकड़" से मुमकिन हैं। सरकार, सियासत, सिनेमा और सहाफत, समाज के नाजुक धागे से जुड़े हैं, साहस, संयम, सावधानी, संकल्प एवं समर्पण इन संबंधों को मजबूत बनाने का "जांचा-परखा-खरा" मंत्र हैं।
संकट के समय सरकार, समाज, सिनेमा, सहाफत "चार जिस्म एक जान” की तरह काम करते हैं, इतिहास इस बात का गवाह है कि आजादी से पहले या बाद में जब भी देश पर संकट आया है, सब ने मिल कर राष्ट्रीय हित और मानव कल्याण के लिए अपनी-अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी के साथ निभाई है।
आज सदियों के बाद कोरोना महामारी के रूप में दुनिया भर में जिस तरह का संकट है, ऐसी चुनौती कई पीढ़ियों ने नहीं देखी है। फिर भी एक परिपक्व समाज, सरकार, सिनेमा और मीडिया की भूमिका निभाने में हमनें कोई कमीं नहीं छोड़ी, खासकर भारत में इन वर्गों ने “संकट के समाधान” का हिस्सा बनने में अपनी-अपनी भूमिका निभाने की कोशिश की। पिछले 6 महीनों में सरकार, समाज, सिनेमा और मीडिया के करैक्टर, कार्यशैली, कमिटमेंट में बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। आज समाज के हर हिस्से की कार्यशैली और जीवनशैली में बड़े बदलाव इस बात का प्रमाण है।