नई दिल्ली, 22 फरवरी, 2020: आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भारतीय छात्र संसद के 10वे वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन को सम्बोधित किया। इस सम्मेलन में देश भर के 450 विश्वविद्यालयों के लगभग 10 हजार छात्र शामिल हुए हैं। बंटवारे के बाद हिंदुस्तान का सेक्युलर-डेमोक्रेटिक देश बनना, बहुसंख्यकों के संस्कार-सोंच का नतीजा है और "अनेकता में एकता" के मजबूत ताने-बाने का प्रमाण है। कुछ लोग "गुमराही के गीत" और "भ्रम के संगीत" के जरिये देश के सौहार्द, सेक्युलरिज्म और संविधान के ताने-बाने का अपहरण कर अपनी सनकी "सियासत की सेज" सजाने की साजिश में लगे हैं। हमारा संवैधानिक ढांचा सामाजिक सौहार्द और सभी के सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक अधिकारों के सुरक्षा की गारंटी है। जिस तरह से मौलिक अधिकारों के सम्बन्ध में हम जागरूक रहते हैं उसी तरह से मूल कर्तव्यों के प्रति भी हमें जिम्मेदारी समझनी होगी। अधिकार और कर्तव्य दोनों एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते। "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" केंद्र की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार का राष्ट्रधर्म है। मोदी सरकार की हर एक योजना का केंद्र बिंदु गांव, गरीब, किसान, नौजवान, महिलाएं और कमजोर तबका हैं